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गोशाला की संरचना तथा सफाई

UK Atheya / 255, Cattle, Cattle Housing /

विभिन्न डेरी चित्र

गोशाला पूर्व पश्चिम में बनाई जानी चाहिए जिसे जाडे में धूप पाये तथा गर्मी न हो।

डेरी बनाने की दिशा चित्र 5.1

जाडे तथा गर्म में सूर्य कि दिशा चित्र 5.2

ब्याने वाली गाय के 10X10 फीट (100 वर्ग मी.) के बच्चा देने वाले वाडे मे रहती है। जैसा कि चित्र में दिखाया गाया है।

बयाने वाली गाय का आवास चित्र 5.3

गायो को चारा खिलाने की विधि चित्र 5.4

पशु को चारा आगे से डाला जाता है। पशु चारा जमीन से खाता है। पशु के लिए चारा, पानी, और धूप एवं छाया हर समय उपलब्ध होना चाहिए जिससे खुला पशु अपनी इच्छानुसार स्थान ग्रहण कर सके इससे समय तथा श्रम की बचत होती है। चारा डालने के लिए आगे से टैªक्टर जाने का स्थान होना आवश्यक है। और उसकी नाद के उपर कोई शेड नहीं होता है। इससे उसके खाने में के स्थान पर जीवाणु विकसित नहीं होते है। पशु छाया में खाने के स्थान से दूर बैठते है। यदि आप खाने के स्थान पर छाया कर देंगे तो पशु वहीं बैठेंगे और दूसरे पशु को चारा खानें में अवरोध उत्पन्न करेंगे।

गायो के दूध निकलने का स्थान

गायो के दोहन करने का स्थान प्रत्येक गाय को खडा होने के लिए 7 फुट 4 फुट तथा 9 इंच ऊचे फर्श की आवश्यकता होती है जैसा चित्र मे दिखाया गया है।

गाय के दूध निकालने का स्थान चित्र 5.5

पशु का दूध निकालने का स्थान, पशु के खडे होने का स्थान ऊँचा होता है जिससे गोबर ग्वाले और बाल्टी पर न पडे। और पशु के सीधा खडे होने के लिए बाड़ लगी होती है। दूध निकालने का स्थान व गाय के रहने का स्थान अलग – अलग होता है।

शेड की ऊचाई तथा शेड की छाया

गाय को खुला रखे तथा प्रत्येक गाय के लिए 100 से 75 ेु फीट जगह दे गाय शेड के नीचे न बैठ कर शेड की छाया मे बैठेगी यदि आपका शेड 18 फीट से ज्यादा ऊचा है तो शेड में प्रत्येक स्थान पर धूप आयेगी आधुनिक फार्म के खुले वाडे तथा ऊचे शेड तथा इस बाडे गाय खुली रहती है। तथा प्रत्येक गाय को 100 फीट का स्थान मिला होता है इसको धूप छाया एवं चारा ग्रहण करने की स्वतन्त्रता रहती है। इस प्रकार से आप श्रम या समय की बचत की सकते है।

पशु के चिकित्सा का स्थान

पशु को इलाज के लिए काबू करने का कटघरा चित्र 5.14

पशु के आवास में अधिक धन न लगाये प्रत्येक पशु को सामान रूप से छाया मिले तथा वह हर समय चारा ओर पानी पीने के लिए स्वतन्त्र रहे।

गायों का सस्ता आवास चित्र 5.15

पानी की व्यवस्था का अवलोकन कीजिए और छत घास-फूंस की भी बना सकते है और इनके बैठने का स्थान कच्चा होना चाहिए। चारे के स्थान पर शेड नही होना चाहिए और चटाई व घास – फूंस से भी शेड लगा सकते है वर्षा से पशु को कोई प्रभाव नही पडता है। गाय के आवास मे अधिक व्यय न करें। पशु के सम्बर्धन एवं पोषण पर व्यय करें।

खुले वाडे मे पानी की व्यवस्था चित्र 5.16

बछियो को आवास

बच्चो के आवास की व्यवस्था चित्र 5.19

प्रत्येक बछिया का आवास अलग होना चाहिए तथा दाना पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। जब वह 1 कि.लो. दाना खाने लगे तब दूध देना बंद कर दें। जब वह 3 कि.लो. दाना खाना लगे तब उसे चारा देना शुरू करे चारा देने पर उसे केवल 1 कि. लो. दाना दे। आवास का ताप 25 से 30 सेन्टीग्रेड

गर्मी का गाय पर असर

संकर गायों का शारीरिक तापक्रम 38 से 39.3 डिग्री के बीच होता है। आस-पास के वातावरण का तापक्रम यदि शरीर के तापक्रम से कम हो तो पशु ज्यादा खा कर ऊर्जा की उत्पत्ति कर लेता है । परन्तु यदि वातावरण शरीर के तापक्रम से ज्यादा हो तो वो गर्मी को श्वास द्वारा बकिलो0र निकालता रहता है।


विदेशी गायो पर गर्मी का प्रभाव यह गाय 25 डिग्री सेंटी गे्रट से अधिक तापक्रम पर तनाव में आ जाती है। परन्तु हमारी देशी गाय 40 से 45 डिग्री सेंटी ग्रेट पर आसानी से रह लेती है। कृप्या तापक्रम तथा आंद्रता का ग्राफ देखे । इन गायो के लिए बरसात की सड़ी गर्मी जानलेवा होती है। यदि तापक्रम अधिक हो तो इन्हें कूलर लगाकर रकिलो0त मिल सकती है। परन्तु बरसात में कूलर काम नहीं करता है।

गोशाला को कैसे साफ रखे

गोशाला में देशी गाय, भैस तथा विदेशी गाय साथ साथ न रखे। क्योकि देशी गाय चिडचिडी नही लगती। क्योकि विदेशी गाय पर सबसे अत्यधिक चिचिडि या किलनी (वाह्यय परजीवी) लगती है और उन पर ज्यादा लगने से देशी गाय या भैस में लग सकती है। पशु का बाडा हवादार होना चहिए जिससे धूप वाडे में हर स्थान पर पडे । बह्यपरजीवी के लिए कीटनाश्क ब्सपदंत ;टपतजतं्रद्ध का प्रयोग करे।

बाडे को साफ क्यो रखे

वैसे तो बीमारियो से बचने के लिए खुरपका, गलगोटू, लगडी, गर्भपात, बोवइन वाइरल डारिया एवम थेलिलिया के टीके है परन्तु थनेला बच्चे दानी का रोग संे बचने के लिए यह आवश्यक है कि आप गोशाला को साफ रखे।

गन्दें शेड में होने वाली बीमारिया

गन्दे शेड में ज्यादा गर्मी या धूप न आने के कारण पशुओ की प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। जिससे आंत की बीमारी और फेफडे की बीमारी हो सकती है शेड में बिल्ली चूहा कुत्ता आदि ना रखे। तथा शेड के पास कोई पेड नही होना चाहिए।
क्योकि पेड पर बैठी चिडिया भी बीमारी फैलती है।

शेड को कीटाणु राहित कैसे रखे

कीटाणु रहित रखने के लिए यह आवश्यक है। किसी प्रकार से पशु की मत्यु हो जाती है तथा कोई नया पशु लाते है या यदि आपके आस पास कोई पशुओ में रोग फैल रहा है तो आप अपनी शेड को दिन में दो बार ज्ञवीतेवसपद ;टपतइंबद्ध फिनायल या डिटाॅल का प्रयोग करें। से कीटाणु रहित करे। इस्तेमाल होने वाले जूते भी ज्ञवीेतेवसपद से भीगा कर पहने एवम् गोशाला के द्वार पर पैरांे को पोंछने के लिए पैरो पर ज्ञवीेतेवसपद से भीगी बोरी रखे।

काटने वाली मक्खी डास एवं मच्छर से गायो को कैसे बचाये

मच्छरो के काटने से एपीमीरार बुखार तथा डाॅस (काटने वाली मख्खी) टिप्पेनोसोमा की बीमारी गायो को हो जाती है। मक्खी सभी रोगो को फैलने का कार्य करती है। मक्खी दूध दुहान की जगह सबसे अधिक होती है। उनके वजह से दूध की गुणवता खराब हों जाती है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय है।

  1.  गायो को खुले वाडे में रखे।
  2. प्रति पशु 100 वर्ग फीट का स्थान दे जिसमें पानी चारा तथा धूप छाया रहे।
  3. गौशाला का शेड इतना ऊँचा हो कि उसमें प्रत्येक स्थान पर धूप पडे।
  4. गाय जुगाली करते वक्त 500 से 700 लीटर गैस निकलती है। जिसमें कार्बनडाइ आक्साइड प्रमुख गैस हैं। यह गैस गायो के पास मच्छरो को आकर्षित करती है
  5. अपने डेरी फार्म में सौर ऊर्जा से चलने वाले पखे लगने की प्रयन्त करे क्योकि गर्मी के महीनो में बिजली जाने पर दूध उत्पादन में बडा नुकसान हो जाता है।
  6. पोर ओन (क्लीनी) मरने वाली दवाईयो से इस्तमाल से डास तथा मक्खी मच्छर मर जायेगंे ।
  7. गायो के वाडे में मच्छरो मक्खी को भगाने के लिए धुआ ना करे पहले ही गाय कार्बनडाइ आक्साइड निकाल रही है।
  8. जो पशु दूध नही दे रहे ओर ग्वान है उन्हे हाइटेªक ;टपतइंब) इन्जेक्शन लगवाये।
  9. आप गाय के वाडे में परदे तथा जाली कदापि ना लगाये ऐसा करने से हवा के स्वतन्त्र प्रवकिलो0 में रूकावट आती है एवं उसे उत्पादन कम होता है।
  10. मच्छर मक्खी के प्राकृतिक नियन्त्रण के लिए गिनीफाउल पाले। गिनीफाउल मक्खी मच्छर चूहा, दीमक, कोकरोज तथा सांप झछूदर को खा जाते है

 

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