दूध का महत्व

जब कृषि विकास की बात की जाती है तब अनाज, फल और सब्जियों के उत्पादन की बात की जाती है परन्तु हाॅलिस्टीन तथा जर्सी गायों के अति हिमकृत बीज से बहुत सी ऐसी गाय उत्पन्न हो गई है जो कि 15 से 30 लीटर दूध प्रतिदिन बडे आराम से दे देती है और कृषक अनाज, पफल एवं सब्जी के स्थान पर चारे की पफसल उगा रहा है जिससे पशु रखकर प्रतिदिन आय का स्रोत प्राप्त होता है।

और गोबर से गोबर गैस मिलने के साथ-साथ खेत में खाद भी मिलती है। अब कृषक डेयरी व्यवसाय का उद्योगीकरण कर रहा है। अर्थात वह 10 गाय रखकर 100 लीटर दूध प्रतिदिन उत्पादित करना चाहता है। इस कार्य में गाय के दोहन श्रमिको की कमी के कारण की एक विकराल समस्या, है। इस समस्या के निवारण के लिए पंजाब, हरियाणा, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र व दक्षिणी भारत में दूध निकालने की मशीन का अत्यधिक प्रयोग हो रहा है और छोटा किसान खेती-बाडी से हटकर दूध उत्पादन में अधिक रुचि दिखा रहा है।
यह पुस्तक दुग्ध मशीन के इतिहास उसकी कार्य प्रणाली और उसमें आने वाली दिक्कते एवं उसके मिलने के स्रोत के विषय में सूचनाएं प्रदान करती है। आशा है कि यह पुस्तक धन एवं व्यवसाय की वृद्धि में सहायक होगी।