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Cattle

मिल्किंग मशीन का इतिहास

दूध में फैट को चैक करने एवं क्रीम निकालने की मशीन का अविष्कार मिल्किंग मशीन से पहले हुआ था। 19वीं शताब्दीके आरम्भ तक यह सोचा जाता रहा कि मिल्किंग मशीन को लगाने से गायों को बहुत हानि होगी। 19वीं शताब्दी तक दूध निकालने के लिए लौहे या हड्डी की टयूब थन में लगाई जाती थी…

दूध का महत्व

जब कृषि विकास की बात की जाती है तब अनाज, फल और सब्जियों के उत्पादन की बात की जाती है परन्तु हाॅलिस्टीन तथा जर्सी गायों के अति हिमकृत बीज से बहुत सी ऐसी गाय उत्पन्न हो गई है जो कि 15 से 30 लीटर दूध प्रतिदिन बडे आराम से दे देती है और कृषक अनाज,…

विभिन्न देशों में मनुष्य तथा गायों का अनुपात

दुनिया के पांच देशों में दूध देने वाले पशुओं की संख्या मनुष्यों की संख्या से अधिक है। सबसे ज्यादा पशु 12 मिलियन उरगुवै (ब्राजील के पास का देश) में हैं। वहां की जनसंख्या 3 मिलियन है। अर्थात वहां प्रति मनुष्य 3.5 पशु हैं।

अच्छी गाय के साथ अच्छा दुहने वाला भी जरूरी

गाय बेशक दूध की ‘ए.टी.एम’ यानि आटोमेटिक मशीन की तरह है। मगर ध्यान रहे अगर इसे दुहने वाला अनाड़ी है तो ये जादुई मशीन बेकार भी हो सकती है। अगर ढंग से दूध नहीं दुह पाये तो वह धीरे-धीरे दूध देना ही बंद कर देगी।

पशु-आहार

    सब्जी मंडी में जो सब्जी मनुष्यों के खाने लायक नहीं रहती, पशु को खिलाना अच्छा होता है। फलों का जूस निकालने के बाद बचा गूदा भी पशुओं के लिए लाभदायक होता है और गूदा का सदुपयोग भी हो जाता है।