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खुरों की सड़ान (Foot Rot in Cattle)

UK Atheya / Cattle, Cattle Disease /


यह रोग भेड़-बकरी, गायों के बच्चों में फैलने वाला संक्रामक रोग है यह गायों के लिए बहुत कष्टदाई होता है।

इससे बहुत गन्दी बदबू भी आती है, जिस वजह से आप पशु के पास खड़े नहीं रह सकते। इसका प्रभाव उत्पादन तथा प्रजनन पर तो पड़ता ही है, परन्तु ऐसे पशुओं को बेचा भी नहीं जा सकता। इस रोग में पैरों में कीड़े पड़ जाते हैं, जिनको निकालने के लिए पशु बार-बार पैर झटकता है। यह रोग अधिक तापक्रम तथा कम आर्णता वाले गर्मी के मौसम में खुरों में घाव पड़ जाने की वजह से होता है। प्रायः यह रोग खुरपका मुंहपका बीमारी के बाद देखा गया है। यह चोट या नुकीली चीज खुर में गढ़ जाने की वजह से भी होता है। जो पशु अकसर गोबर और पानी में खड़े रहते हैं, उनमें इस
रोग की सम्भावना अधिक बढ़ जाती है। इसलिए पशु के बैठने का स्थान जमीन से 8 इंच ऊपर होना चाहिए तथा उसकी लम्बाई 6-7 फीट व चैडाई 4 पफीट होनी चाहिए। यह रोग फ्रयूसो बेसिपेरिम, क्रोपफोरम, बैक्टीराइड्स, मेटानिनोजेनिकस बैक्टीरिया से होता है। यह बैक्टीरिया खुरों में घाव कर देते हैं। दूसरा बैक्टीरिया डिचेलोबेक्टर नोडोसस ऊपर के बैक्टीरिया से हुए घाव में सड़न पैदा करता है। इस रोग में कम्बेक्टान का इंजैक्शन 2 एम.एल. प्रति 50 किलो यानि 8 से 10 एम.एल. मांस में 5 दिन तक लगाये। यदि अगर घाव में कीड़े दिखाई दें और पशु बार-बार पैर झटक रहा हो तो कीड़े मारने वाला स्प्रे डालना चाहिए। ऐसे पशु को सापफ-सुथरी जगह पर अलग बांॅधना चाहिए, ताकि ये रोग
दूसरे पशुओं को न लगे। पिफनायल या कपूर का प्रयोग कीड़े मारने के लिए नहीं करना चाहिए।

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