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भैंस की प्रमुख नस्लें

UK Atheya / Buffalo, Buffalo Breed /

मुर्रा भैस

यह दुध देने वाली सबसे उत्तम भैंस हैं। भारत एवं अन्य देशों में भी इसके बीज का कृत्रिम गर्भाधान प्रयोग किया जाता हैं। मुंबई के आस-पास लगभग 1 लाख मुर्रा भैंसे हैं तथा हजार भैंसों वाले भी बहुत से फार्म हैं यह इस कारण हैं कि यह प्रतिदिन 10 से 20 लीटर दूध देती हैं जिसमें चिकनाई की मात्रा गाय के दूध से दोगुना होती हैं। तथा इसका दूध मिठाई, दही, लस्सी तथा मौजरेला चीज में इस्तेमाल होती है।

भारत इस भैंस के कारण दुनिया में सबसे अधिक भैंेस रखने वाला देश हैं तथा भारत का आधा दुग्ध उत्पादन इसी भैंस से होता हैं। अच्छी मुर्रा भैंस एक व्यात में 4 हजार लीटर दूध देने की क्षमता रखती है। भैस कई बार ब्याती है तथा बूढ़ी होने पर अच्छी कीमत मे बिक जाती है।

नीली एवं रावी भैस


जैसा कि चित्र में दिखाया गया है, इसके चारों पैर नीचे से घुटने तक सफेद होते है तथा यह पाकिस्तान में रावी नदी के किनारे ज्यादा पायी जाती है। और इसे पंजाब में भी देखा जा सकता हैं। यह मुर्रा की तरह ही दिखाई देती है। इसका दुग्ध उत्पादन मुर्रा से कुछ कम होता है।

भदावरी भैंस

यह मथुरा, आगरा, इटावा में होती है। इसके दूध में 14 से 18 प्रतिशत फैट होता है। यह तांबे के रंग की होती है। तथा यह 800 से 1000 लीटर दूध प्रति व्यांत देती है।

पंधारपुरी भैस

यह भैंस एक व्यांत में 700 से 1200 लीटर दूध देती है। यह पंधारपुर जैसे गर्म स्थानों पर रह लेते है। इसके भैंसे खेती के लिए अति उत्तम होते है।

महसाना भैस

यह भैंस एक व्यांत में 1200 से 1500 लीटर दूध देती है। इसके भैंसे खेती के लिए बहुत अच्छे होते है। यह महासान जिले में पाई जाती है। इसमें प्रजनन की कोई समस्या नही होती है। पर इसको मुर्रा भैस से क्राॅस करा के दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है।

स्वम्प भैंस

यह भैंस कीचड में रहना पसंद करती है। इस भैंस पर बाढ़ का कोई खास असर नहीं पडता है। यह भैंस एक व्यांत में 500 से 700 लीटर दूध देती है। यह भैंस दक्षिणी चाइना में ज्यादा पायी जाती है। और यह मुख्य रुप से धान की खेती व मांस उत्पादन के लिए पाली जाती है। इसे जीवित ट्रैक्टर भी कहते है।

जाफरावादी भैंस

इसका प्रयोग मीट के लिए भी होता है। जाफरावादी गुजरात की भैंस हैं। उनका सर भारी होता है इनके सींग नीचे की ओर झुके होते है। यह शरीर में भारी होती है उनका वजन 800 सौ के.जी. हो जाता है यह साल में दो हजार लीटर दूघ देती है। इसके दूध में वसा की मात्रा 7 प्रतिशत से अधिक पायी जाती है।

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